शोधांचल

हिंदी साहित्य के गहन अध्ययन का मंच

साहित्य, कला, संस्कृति, शिक्षा और इतिहास पर मौलिक शोध को समर्पित बहुभाषी, बहुविषयक त्रैमासिक पीयर-रिव्यूड ई-पत्रिका।

खंड-२ · वर्ष २०२६शोधांचलअंक-३
जुलाई-सितम्बर

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खंड-२, अंक-३जुलाई-सितम्बर २०२६ओपन एक्सेस

शोधांचल का ताज़ा अंक पीडीएफ़ में निःशुल्क उपलब्ध है। पूरे विश्व के पाठक, विद्यार्थी और शोधार्थी इसे बिना किसी बाधा के पढ़ और डाउनलोड कर सकते हैं।

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पत्रिका एक नज़र में

शोधांचल उच्च स्तरीय, मौलिक और नवाचार-युक्त शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रकाशित होती है।

डबल-ब्लाइंड समीक्षा

लेखक और समीक्षक की पहचान एक-दूसरे से गुप्त रहती है, ताकि मूल्यांकन केवल गुणवत्ता पर हो।

बहुभाषी और बहुविषयक

हिंदी, अंग्रेज़ी में शोध-पत्र स्वीकार किए जाते हैं। मानविकी, समाज विज्ञान, विज्ञान, वाणिज्य और तकनीकी विषय शामिल हैं।

ओपन एक्सेस

प्रकाशित शोध-पत्र वेबसाइट पर मुफ़्त पढ़ने और डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध रहते हैं।

मौलिकता की जाँच

प्लेजरिज्म सॉफ़्टवेयर से जाँच होती है। १०% से अधिक समानता पर शोध-पत्र अस्वीकृत होता है।

प्रकाशकसाहित्य रत्न
प्रधान सम्पादकत्रिलोकी सिंह
सम्पादकगीता शर्मा (अवैतनिक)
ISSN3139-4639
अवधित्रैमासिक · प्रथम अंक जनवरी-मार्च २०२५
विषयसाहित्य, कला, संस्कृति, शिक्षा, इतिहास एवं विविध
प्रकाशन स्थाननौगांव, सादाबाद, उत्तर प्रदेश-281306

शोध-पत्र कैसे प्रकाशित होता है

सभी शोध-पत्र केवल ऑनलाइन माध्यम से (ईमेल या जर्नल पोर्टल द्वारा) स्वीकार किए जाते हैं।

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प्रारंभिक जाँच

संपादक मंडल पत्र को समीक्षा के लिए भेजता है या अस्वीकार करता है।

डबल-ब्लाइंड समीक्षा

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प्रकाशन

स्वीकृत पत्र ओपन एक्सेस में पीडीएफ़ के रूप में प्रकाशित होता है।

नीतियाँ और उप-नियम

प्रकाशन में ईमानदारी और उच्च नैतिक मानकों के लिए हमारी प्रमुख नीतियाँ।

मौलिकता और साहित्यिक चोरी निषेध

केवल पूर्णतः मौलिक शोध-पत्र स्वीकार होते हैं, जो कहीं और प्रकाशित या विचाराधीन न हों। १०% से अधिक समानता मिलने पर पत्र तुरंत अस्वीकृत किया जाता है।

शपथ-पत्र

लेखक को शोध-पत्र के साथ उसकी मौलिकता और अप्रकाशित होने का शपथ-पत्र देना होगा।

कॉपीराइट नीति

लेखक 'कॉपीराइट ट्रांसफर फ़ॉर्म' पर हस्ताक्षर करेगा, जिसमें घोषणा होगी कि शोध उसका अपना है और किसी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ।

हितों का टकराव

लेखक, संपादक और समीक्षक संभावित हितों के टकराव की घोषणा करेंगे। लेखक के संस्थान से जुड़ा समीक्षक उसका पत्र नहीं देख सकेगा।

प्रकाशन नैतिकता और शुद्धिपत्र

डेटा से छेड़छाड़ या गलत दावे मिलने पर पत्र प्रकाशन के बाद भी वापस लिया जा सकता है। गंभीर त्रुटि पर अगले अंक में ऑनलाइन शुद्धिपत्र जारी होगा।

डिजिटल संरक्षण

सभी अंक पीडीएफ़ रूप में पत्रिका के सर्वर और क्लाउड आर्काइव में सुरक्षित रखे जाते हैं।

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